Hindi(Kshitij) Class 9 : पाठ 1 - दो बैलों की कथा
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पाठ - 1दो बैलों की कथा लेखक ‐ श्री मुंशी प्रेमचंद
शब्दार्थ -
निरापद - आपत्ति रहित
सहिष्णुता - सहनशीलता
पदवी - स्थान, नाम
अनायास - अचानक
कुलेल - मिट्टी में लोट‐पोट लगाना
विषाद - दुख
पराकाष्ठा - चरम सीमा
कदाचित् - शायद
बछिया के ताऊ - मूर्ख
चेष्टा -कोशिश
पगहिया -पशु बाँधने की रस्सी
कबूल - स्वीकार
अभूतपूर्व - जो पहले कभी न हुई हो
प्रतिवाद - विरोध में तर्क
ताकीद - चेतावनी, निर्देंश
सहसा - अचानक
मसहलत - हितकर
रगेदना - खदेड़ना
मल्लयु़द्व - कुश्ती
साबिका - वास्ता, सरोकार
रेवड़ - पशुओं का झुंड़
नगीच - निकट
भीत - डरा हुआ
नाहक - बेकार, व्यर्थ
ग्रास - कौर
हार - खेत
प्रश्न - अभ्यास
प्रशन 1) कांजीहौस में कैद पशुओं की हाज़िरी क्यों ली जाती होगी?
उत्तर 1) कांजीहौस में कैद पशुओं की हाजिरी इसलिए ली जाती होगी क्योंकि -
# पशुओं की संख्या का टीक‐टीक पता चल सके।
# कोई पशु बीमार तो नहीं है, इसका पता लगाया जा सके।
# समूह में उत्पात मचानेवाले पशुओं की अलग व्यवस्था की जा सके।
प्रशन 2) छोटी बच्ची को बैलों के प्रति प्रेम क्यों उमड़ आया?
उत्तर 2) छोटी बच्ची की माँ मर चुकी थी। वह माँ के बिछुड़ने का दर्द जानती थी। इसलिए जब उसने हीरा‐मोती की व्यथा देखी तो उसके मन में उनके प्रति प्रेम उमड़ आया। उसे लगा कि वे उसी की तरह अभागे हैं और अपने मालिक से दूर हैं।
प्रशन 3) कहानी में बैलों के माध्यम से कौन-कौन से नीति-विषयक मूल्य उभर कर आए हैं?
उत्तर 3) कहानी में बैलों के माध्यम से अनेक नीति‐विषयक मूल्य उभरकर आए हैं। उनमें से कुछ निम्नलिखित हैं-
# सच्ची मित्रता की भावना।
# मिल‐जुलकर रहने की भावना।
# निःस्वार्थ परोपकार की भावना।
# नारी जाति का सम्मान की भावना।
# स्वतंत्रता‐प्रियता व धर्मपरायणता की भावना।
प्रशन 4) प्रस्तुत कहानी में प्रेमचंद ने गधे की किन स्वभावगत विशेषताओं के आधार पर उसके प्रति रूढ़ अर्थ 'मूर्ख' का प्रयोग न कर किस नए अर्थ की ओर संकेत किया है?
उत्तर 4) गधे को उसके स्वभाव के आधार पर मूर्खता का पर्याय समझा जाता है, पर प्रेमचंद ने उसकी स्वाभाविक विशेषताओं,सरलता और सहनशीलता के आधार पर एक नए अर्थ की ओर हमारा ध्यान खींचा है। गधे में निहित गुणों के आधार पर लेखक ने उसकी तुलना ऋषि‐मुनियों से की है। सुख‐दुख, लाभ‐हानि तथा विपरीत परिस्थितियों में एक जैसा बने रहने के गुण के कारण लेखक ने उसके सरल और सहनशील होने की ओर संकेत किया है।
प्रशन 5) किन घटनाओं से पता चलता है कि हीरा और मोती में गहरी दोस्ती थी?
उत्तर 5) दो बैलों की कथा नामक पाठ में एक नहीं अनेक घटनाएँ हैं, जिनसे पता चलता है कि हीरा‐मोती में गहरी मित्रता थी। जैसे-
# हीरा और मोती एक‐दूसरे को चाटकर और सूँघकर एक‐दूसरे के प्रति अपना प्रेम प्रकट करते थे।
# हल में जोते जाते समय दोनों की यही कोशिश रहती थी कि ज्यादा से ज्यादा भार अपनी ओर ही रहे।
# गया द्वारा हीरा की पिटाई से दुखी मोती हल लेकर भागा, जिससे हल,जोत, जुआ सब टूट गए।
# मटर खाते समय मोती के पकड़े जाने पर हीरा भी वापस आ गया और दोनों ही कांजीहौस में बंदी बनाए गए।
# जब उनके सामने विशालकाय साँड़ आ खड़ा हुआ तो उन्होंने योजनापूर्वक एक‐दूसरे का साथ देते हुए उसका मुकाबला किया और उसे मार गिराया।
प्रशन 6) 'लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है, यह भूल जाते हो।'- हीरा के इस कथन के माध्यम से स्त्री के प्रति प्रेमचंद के दृष्टिकोण को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर 6) हीरा के इस कथन से लेखक का दृष्टिकोण ज्ञात होता है कि उस समय समाज में स्त्रियों की स्थिति अच्छी नहीं थी। वे पुरुषों द्वारा शोषित थीं। सामाजिक नियमों के अनुसार स्त्रियों को शारीरिक दंड देना उचित नहीं है। लेखक स्त्रियों की प्रताड़ना का विरोधी है। वह नारियों के सम्मान का पक्षधर है। वह स्त्रियों तथा पुरुषों की समानता का पक्षधर है।
प्रशन 7) किसान जीवन वाले समाज में पशु और मनुष्य के आपसी संबंधों को कहानी में किस तरह व्यक्त किया गया है?
उत्तर 7) पशु आदिकाल से ही मनुष्यों के साथी रहे हैं। मनुष्य ने कभी उन्हें सुरक्षा के लिए पाला तो कभी आर्थिक लाभ के लिए। किसान‐जीवन में हल चलाने, बोझा ढोने, पानी खींचने तथा सवारी करने के लिए पशुओं का प्रयोग करते हैं।
प्रेमचंद जी किसान‐जीवन में मनुष्य तथा पशु के भावनात्मक संबंधों को हीरा और मोती दो बैलों के माध्यम से व्यक्त किया है। हीरा और मोती दोनों झूरी नामक एक किसान के बैल है जो अपने बैलों से बहुत प्रेम करता है। इसलिए हीरा और मोती भी अपने मालिक झूरी को छोड़कर कहीं और नहीं रहना चाहते हैं। इससे यह स्पष्ट है कि पशु भी स्नेह का भूखा होता है। प्रेम पाने से वे भी प्रेम व्यक्त करते हैं और क्रोध व अपमान पाकर वे भी असंतोष व्यक्त करते हैं। इसलिए हर मुसीबत पर विजय पाते हुए प्रेम न करने वाले गया के घर से भागकर पुनः झूरी के पास आ जाते हैं।
प्रशन 8) 'इतना तो हो ही गया कि नौ दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगें' - मोती के इस कथन के आलोक में उसकी विशेषताएँ बताइए।
उत्तर 8) मोती के उक्त कथन के आलोक में उसकी निम्नलिखित विशेषताएँ प्रकट होती हैं -
# मोती स्वभाव से उग्र जरूर है, पर दयालु भी है।
# मोती का स्वभाव परोपकारी है। वह कांजीहौस में बंद जानवरों की जान बचाता है।
# मोती सच्चा मित्र है। वह मुसीबत के समय हीरा का साथ नहीं छोड़ता है।
# मोती अत्याचार का विरोधी है। वह कांजीहौस की दीवार तोड़कर अत्याचार का विरोध करता है।
# मोती साहसी है। वह हीरा की मदद से साँड़ को पराजित करता है।
प्रशन 9) आशय स्पष्ट कीजिए -
(क) अवश्य ही उनमें कोई ऐसी गुप्त शक्ति थी, जिससे जीवों में श्रेष्ठता का दावा करने वाला मनुष्य वंचित है।
(ख) उस एक रोटी से उनकी भूख तो क्या शांत होती; पर दोनों के हृदय को मानो भोजन मिल गया।
उत्तर 9)(क) यहाँ लेखक का आशय पशुओं के आपसी स्नेह से है। पशु एक‐दूसरे के विचार, भाव तथा शब्द इतनी आसानी से समझ जाते हैं जो मनुष्यों में देखने को नहीं मिलता। मनुष्य एक बुद्विजीवी प्राणी है तथा सभी जीवों में श्रेष्ठ है परन्तु फिर भी प्रेम तथा भावनात्मक सम्बन्धों के प्रति जागरुकता पशुओं में अधिक देखने को मिलती है।
(ख) यहाँ मनुष्य तथा पशुओं के आत्मीय सम्बन्धों को व्यक्त किया गया है। दिन भर भूखा रहने के बाद भी उस छोटी सी लड़की द्वारा दिए गए रोटी से उनकी भूख तो नहीं मिटती थी परन्तु दोनों के हृदय को संतुष्टि मिलती थी। क्योंकि लड़की से उनको आत्मीयता हो गई थी।
प्रशन 10) गया ने हीरा-मोती को दोनों बार सूखा भूसा खाने के लिए दिया क्योंकि -
(क) गया पराये बैलों पर अधिक खर्च नहीं करना चाहता था।
(ख) गरीबी के कारण खली आदि खरीदना उसके बस की बात न थी।
(ग) वह हीरा-मोती के व्यवहार से बहुत दुःखी था।
(घ) उसे खली आदि सामग्री की जानकारी न थी।
(सही उत्तर के आगे (✓) का निशान लगाइए।)
उत्तर 10) (ग) वह हीरा‐मोती के व्यवहार से बहुत दुखी था।
रचना और अभिव्यक्ति
प्रश्न 11) हीरा और मोती ने शोषण के खिलाफ आवाज़ उठाई लेकिन उसके लिए प्रताड़ना भी सही। हीरा-मोती की इस प्रतिक्रिया पर तर्क सहित अपने विचार प्रकट करें।
उत्तर 11) शोषण के खिलाफ आवाज उठाना सरल नहीं है। शोषक, विद्रोही को सदा प्रताड़ित करता है। इस डर से बहुत से लोग विरोध करने से डरते हैं।हीरा‐मोती ने हर जगह शोषण के खिलाफ आवाज उठाई और परिणामस्वरूप वे सताए गए। पर उन्होंने चिंता नहीं की। उन्होंने गया के अत्याचारों से दो बार विद्रोह किया। काँजीहौस में वे दीवारें तोड़ने में सफल हुए और पशुओं को भगा दिया। इस प्रकार हीरा और मोती का यह कदम बिल्कुल ठीक था। यदि वे कोई प्रतिक्रिया न करते तो उनका खूब शोषण होता।
प्रश्न 12) क्या आपको लगता है कि यह कहानी आजादी की लड़ाई की ओर भी संकेत करती है?
उत्तर 12) यह कहानी अप्रत्यक्ष रूप से आजादी के आंदोलन से जुड़ी है। ये दो बैल सच्चे भारतीय हैं, जिनमें से एक गाँधी जी की अहिंसा का समर्थक है तो दूसरा उग्र स्वभाव वाला है। दोनों मिलकर आजादी पाने के लिए संघर्षरत रहते हैं। झूरी का घर स्वदेश का प्रतीक है, जहाँ आने के लिए दोनों व्याकुल रहते हैं। उन्हें इसके लिए अनेक बाधाएँ झेलनी पड़ती हैं। जैसे क्रांतिकारियों को जेल एवं कालापानी की सजा होती थी उसी तरह इनको भी काँजीहौस में बंद कर दिया जाता है। वहाँ ये अपने साथियों को मुक्त कराते हैं। दोनों को मारने के लिए बधिक के हाथों बेच दिया जाता है, परन्तु अंततः ये झूरी के घर अर्थात स्वदेश वापस आ ही जाते हैं। इस प्रकार निःसंदेह यह कहानी आजादी की लड़ाई की ओर संकेत करती है।
भाषा ‐ अध्ययन
प्रश्न 13)
बस इतना ही काफ़ी है।
फिर मैं भी ज़ोर लगाता हूँ।
‘ही’, ‘भी’ वाक्य में किसी बात पर जोर देने का काम कर रहे हैं। ऐसे शब्दों को निपात कहते हैं। कहानी में से पाँच ऐसे वाक्य छाँटिए जिनमें निपात का प्रयोग हुआ हो।
उत्तर 13) निपात- जो अव्यव किसी शब्द के बाद लगकर उसके अर्थ को बल प्रदान करते हैं, वे कहलाते हैं।
अर्थात किसी भी बात पर अतिरिक्त भार देने के लिए जिन शब्दों का प्रयोग किया जाता है उसे निपात कहते हैं।
# एक ही विजय ने उसे संसार की सभ्य जातियों में गण्य बना दिया।
# कभी‐कभी उसे भी क्रोध आ ही जाता है।
# उसके चेहरे पर असंतोष की छाया भी न दिखाई देती।
# मार‐पीट न की, नहीं तो मोती भी पलट पड़ता।
# एक मुँह हटा लेता, तो दूसरा भी हटा लेता।
प्रश्न 14) रचना के आधार पर वाक्य भेद बताइए तथा उपवाक्य छाँटकर उसके भी भेद लिखिए-
(क) दीवार का गिरना था कि अधमरे-से पड़े हुए सभी जानवर चेत उठे।
(ख) सहसा एक दढ़ियल आदमी, जिसकी आँखे लाल थीं और मुद्रा अत्यंत कठोर, आया।
(ग) हीरा ने कहा-गया के घर से नाहक भागे।
(घ) मैं बेचूंगा, तो बिकेंगे।
(ङ) अगर वह मुझे पकड़ता तो मैं बे-मारे न छोड़ता।
उत्तर 14) (क) वाक्य भेद - मिश्र वाक्य
प्रधान वाक्य - दीवार का गिरना था
संज्ञा आश्रित उपवाक्य - अघमरे‐से पड़े हुए सभी जानवर चेत उठे।
(ख) वाक्य भेद - मिश्र वाक्य
प्रधान वाक्य - सहसा एक दढ़ियल आदमी आया।
विशेषण आश्रित उपवाक्य - जिसकी आँखें लाल थीं और मुद्रा अत्यंत कठोर।
(ग) वाक्य भेद - मिश्र वाक्य
प्रधान वाक्य - हीरा ने कहा
संज्ञा आश्रित उपवाक्य - गया के घर से नाहक भागे।
(घ) वाक्य भेद - मिश्र वाक्य
प्रधान वाक्य - बिकेंगे
क्रिया विशेषण आश्रित उपवाक्य - मैं बेचूँगा तो
(ड.) वाक्य भेद - मिश्र वाक्य
प्रधान वाक्य - तो मैं बे‐मारे न छोड़ता।
क्रिया विशेषण आश्रित उपवाक्य - अगर वह मुझे पकड़ता।
प्रश्न 15) कहानी में जगह-जगह मुहावरों का प्रयोग हुआ है। कोई पाँच मुहावरे छाँटिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
उत्तर 15) # जी तोड़ काम करना - फैक्ट्रियों में मजदूरों को जी तोड़ काम करना पड़ता है।
# ईंट का जवाब पत्थर से देना - यह दुनिया उसी को सम्मान देती है जो ईंट का जवाब पत्थर से देना जानता है।
# नौ दो ग्यारह होना - बिल्ली को देखकर चूहे नौ दो ग्यारह हो गए।
# दाँतों पसीना आना - इतना भारी सामान उठाने से राकेश के दाँतों पसीना आ गए।
# एक न सुनना - मैंने उसे बहुत समझाया पर उसने एक न सुनी।



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